written by rkrajkamal 910 days ago
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आप लोग पुरी तरह भटक चुके हैं और अब शायद ये सब आप के दिमाग में बैठ गई है अगर आप को लगता है के ये सही है तो ठीक है, अपने अधिकारों, संस्कृति, भाषा, मिट्टी, समुदाय, समाज, इतिहास, स्वतन्त्रता, आदि के समर्थन में लड़ना अच्छी बात है! और मैं इस बात मैं आप का पूरी तरह से समर्थन करता हूँ, मगर किसी को मारने का अधिकार किसी को नही है, देश मैं इतनी भी अराजकता नही है के दो टके की औकात के गुँड किसी गरीब और असहाय के ऊपर हिंसात्मक अत्याचार करें! मेरा विरोध आपके विरोध करने के तरीके पर है, आप एक आम आदमी को मार् सकते हैं मगर ये जो प्रणाली/सिस्टम है आप उसके खिलाफ कभी खड़े नही होते! मैंने तब भी विरोध किया था जब महाराष्ट्र की घटनाओ से आहत हो कर हरियाणा में कुछ लोगों ने एक मराठी मनुष्य के खिलाफ दुर्व्यवहार किया था! आप एक आम आदमी को मार् कर अपनी सभ्यता को कलंकित कर रहे हो, और वैसे भी अभद्र भाषा का प्रयोग और हिंसा का प्रयोग तो एक कमजोर और असभ्य आदमी करता है! लड़ना और भोंकना तो जानवर की प्रवर्ती है! आप विरोध करें और में खुद कह्ता हूँकि विरोध करो मगर अपनी सभ्यता और इन्सानियत का हनन कदाचित न करो!
हमारे क्षत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने भी विरोध किया था मगर अत्याचार का और उन्होने कभी निर्बल और गरीब को नही सताया ! शक्ति का प्रयोग निर्बल और गरीब की सहायता और उसके उत्थान के लिए तथा अत्याचार और बुराई का दमन करने के लिए किया जाता है! इस सब का पालन हमारे क्षत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने किया इसी लिए वह सम्पूर्ण भारत में श्रद्धा और आदर से पूजे जाते हैं! मगर औरंगज़ेब को तो कोई भी नही मानता! इसी प्रकार ठाकरे परिवार की विध्वंस वाली राजनीति का मैं पुरजोर विरोध करता हूँ और करता रहूंगा! अगर वे इस विध्वंस वाली राजनीति को छोड दें तो शायद उन से अच्छा राजनीतिक दल शायद ही कोई हो ! याद रखो मिल कर चलने में ही सब का भला होता है! महाराष्ट्र के उत्थान के लिए ठाकरे परिवार ने बहुत अच्छे काम किए हैं मगर अब शायद ये सब जो हो रहा है सब दुखद है! अपने सुख के लिए किसी को सताना इन्सानियत नही है! मत बताओ दुसरे ने तुम्हारे लिए क्या किया, सोचो तुम ने क्या किया और जो किया क्या वो सही किया ! मानवता सर्वोपरि है! मानवता से बढ कर कुछ भी नही!
written by dhanujeet 905 days ago
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शिवाजी महाराज के टाईम का इतिहास तेरे जैसे लोगो से सुनने कि जरूरत नही है हमे...लेक्चर बाजी करनी है तो युपी या बिहार मे हि जाओ...यहा फाल्तु लोगोको हम भिक नहि डालते...आणि ही साईड आहे ना ति आम्हा मराठी लोकासाठी आहे...सगळी कडे भिका मगायची सवय जाणार कधी तुमची...!!!
दिखवा करुन नाही चालत मनातुन आल पाहिजे ते काय पाणि पुरी वीकन्या येवढ सोप नसत देशाबद्द्ल बोलण
जय भवानि...जय शिवाजी...जय महाराष्ट्र
इसका मतलब नही समझा होगा तो बाळासाहाब या राज ठाकरे साहाब से पुछ लेना
ए, राजकमल! तुझ्या बेगडी वाक्यांची नि तुझ्या खोट्या समर्थनाची गरज महाराष्ट्राला आणि मराठी माणसाला नाही. देशात अराजकता नाही म्हणतोस आणि देशाची अवनती होतेय, असंही म्हणतोस. वा, रे वा! तुला स्वत:ला समजतंय का, तू काय बोलतोयंस ते? आम्हाला शिवाजी महाराजांबद्दल आदर आहे, म्हणून तूही त्यांच्याबद्दल चांगलं बोललास, की तू बाकी इतर विषयावर काहीही प्रतिक्रिया दिलीस तर आम्ही ते खरं मानायचं का? हरियाणात रहाणा-या मराठी माणसाने "माझ्याशी मराठीत बोला" असा माजोरीपणा दाखवला नव्हता, जो इथे येऊन बिहारचे लोक दाखवतात. एका व्यक्तीच्या आंदोलनामागची भूमिकाच जर तुम्हा लोकांना समजून घ्यायची नसेल, तर असे प्रकार घडणारच.
"आमच्याच राज्यात आमच्या मातृभाषेला प्राधान्य द्या" असं हात जोडून विनवल्यानंतर सुद्धा जर तुमच्यासारख्यांना समजत नसेल, तर आम्ही काय तुमच्यासमोर भिक मागायची का रे? आम्ही हातात शस्त्र घेतलं की आम्ही हिंसक आणि "महाराष्ट्राचं बिहार करू" अशा आरोळ्या ठोकणारा लालू म्हणजे कोण? लालू नि मायावती का म्हणत नाहीत की आम्ही उत्तर प्रदेशात मराठी आणू, उत्तर प्रदेशात रहाणा-या मराठी लोकांना प्राधान्य देऊ? का भाषा करतात महाराष्ट्राला बिहार बनवण्याची? या त्यांच्या माजोरीपणाचा परिणाम आहे ’मनसे’.
तुझ्या बोलण्याचा रोख कायम असाच आहे, की मी जे बोलतोय, त्याला सहमती द्या. तुला मुळातच वाचनाची आवड कमी दिसते. लेख नीट न वाचता प्रतिक्रिया देणं हा तुझा स्थायीभाव बनला आहे. तू लिहितानाही विचार करत नाहीस, हे दिसतंय. इतिहास खूप माहित आहे ना तुला? औरंगजेबाने कित्येक मंदिरांना देणग्या दिल्या होत्या, हे ठाऊक आहे का तुला? त्याच्या या पुण्याईमुळे तो बरेच दिवस वाचला, शेवटी मंदिरांना देण-या त्याच हातांनी त्याने आई तुळजाभवानीवर घाला घातला म्हणून त्याचा सर्वनाश झाला.
मिळून वाटचाल करण्याची भाषा करतोस ना, ते तुझ्या भाऊबंदांना जाऊन सांग आणि स्वत:ही आत्मसात कर. त्यांना समजत नाही की महाराष्ट्रात रहायचं असेल, तर तिथल्या संस्कृतीशी एकरूप झालं पाहिजे. मिळून मिसळून रहाणे याचा अर्थ भैया महाराष्ट्रात येऊन माजोरडेपणा करणार तो मराठी लोकांनी सहन करायचा. तोच भैया आंध्र, बंगाल प्रांतात गेला की तिकडची भाषा, संस्कृती सर्व आत्मसात करणार. वा रे तुझी एकात्मता!
अफझलखानला कुणी मानत नाही असं म्हणणा-या तुझ्यासारख्या लोकांसाठी ही एक बातमी. नीट वाच आणि विचार कर. देशाची अधोगती म्हणजे काय आणि अराजक म्हणजे काय हे तुला कळेल.
मुंबई [ओमप्रकाश तिवारी]। मुंबई पर उत्तर भारतीयों के बढ़ते वर्चस्व को मुद्दा बनाकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना [मनसे] भले ही राज्य विधानसभा की 13 सीटें जीत गई हो , लेकिन मुंबई की 22 प्रतिशत सीटों पर कब्जा कर उन्होंने भी अपनी ताकत का एहसास करा दिया है।
मुंबई में कांग्रेस के टिकट पर छह उत्तर भारतीयों ने चुनाव जीता है । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी [राकांपा] और समाजवादी पार्टी के भी एक-एक विधायक महाराष्ट्र विधानसभा में पहुंचे हैं। मुंबई की कुल 36 में से 8 सीटें उत्तर भारतीय प्रत्याशियों को मिली हैं। इतना ही नहीं, अधिकतर सीटों पर उत्तर भारतीय उम्मीदवारों ने मनसे को तीसरे स्थान पर ढकेल दिया है।
कांग्रेस के टिकट पर कृपाशंकर सिंह, रमेश सिंह , राजहंस सिंह, मुहम्मद आरिफ नसीम खान, बाबा सिद्दीकी और असलम शेख ने जीत हासिल की है। राकांपा से नवाब मलिक और सपा से अबू आसिम आजमी को सफलता मिली है।
मुंबई से पहली बार विधानसभा में इतनी बड़ी संख्या में उत्तर भारतीय प्रत्याशी चुनकर पहुंचे हैं। यदि भाजपा ने सही उम्मीदवारों को गलत सीटों से न उतारा होता तो यह संख्या और बड़ी हो सकती थी। कांग्रेस के टिकट पर के टिकट पर चुने गए मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह और मुहम्मद आरिफ नसीम खान तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं। नसीम खान ने तो मुंबई में सर्वाधिक मतों के अंतर से जीतने का रिकार्ड भी कायम किया है, जबकि राकांपा के टिकट पर जीते नवाब मलिक भी तीसरी बार विधानसभा पहुंचे हैं।
जीत हासिल करने वाले शेष उत्तर भारतीय पहली बार विधानसभा में पहुंचे हैं। राज ठाकरे के आक्रामक तेवरों के बाद कांग्रेस ने मुंबई के उत्तर भारतीय मतदाताओं को अपनी ओर खींचने के लिए ही मुंबई कांग्रेस की कमान कृपाशंकर सिंह को सौंपी। कांग्रेस की यही रणनीति लोकसभा चुनावों में भी कामयाब रही थी और मुंबई की सभी छह लोकसभा सीटें कांग्रेस के खाते में गईं। सफलता दोहराते हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को मुंबई की 17 सीटें हासिल हुई हैं। 17 में से 6 सीटों पर कांग्रेस के उत्तर भारतीय उम्मीदवार विजयी रहे।
जीते उत्तर भारतीय
written by mayuri6 908 days ago
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राज कमल tula जर का etkich kalaji आहे न उत्तेर प्रदेश ची तर mag जा की तिकडे महाराष्ट्रात का रहतोस तू ?
written by vinod12345 908 days ago
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ए, राजकमल! मराठी कट्ट्या वर तुझ्यासारख्या उपर्या चे काय काम?
written by mayuri6 908 days ago
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विनोद तुज अगदी बरोबर आहे , राजकमल मराठी कट्ट्यावर कही कम नाहीये त्य्ने व्यवस्तित बगितल नहीं की हे कम्युनिटी फ़क्त मराठी लोकांसाठी आहे बहुतेक राज कमल ला व्यस्तित वाचता येत नहीं त्याच्य्सर्ख्या लोअक्न्मुलेच महाराष्ट्राची वाट लागली आहे ,......................
तु अभी इतिहास नही जनता, पहले जा और पढ रे , इतिहास में सिर्फ शिवाजी और औरन्ग्ज़ेब ही नही हैं रे ...मेरे बच्चे और कुछ भी तो बता, उस से पहले, उसके बाद, तू अभी तक क्या उसी समय में जी रहा है, उसके बाद जो हुआ वो तेरे लिए ,मेरे लिए और सभी के लिए ज्यादा समझना, ज्यादा ज़रूरी है, .........तू बच्चों जैसी बतें मत कर, थोडा पढ औरसमझ.
ओए मोगराफुलाला
तु अभी इतिहास नही जनता, पहले जा और पढ रे , इतिहास में सिर्फ शिवाजी और औरन्ग्ज़ेब ही नही हैं रे ...मेरे बच्चे और कुछ भी तो बता, उस से पहले, उसके बाद, तू अभी तक क्या उसी समय में जी रहा है, उसके बाद जो हुआ वो तेरे लिए ,मेरे लिए और सभी के लिए ज्यादा समझना, ज्यादा ज़रूरी है, .........तू बच्चों जैसी बतें मत कर, थोडा पढ और समझ.
मुझे अच्छा लगा ,कम से कम चार लोगों ने मुझे जवाब दिया ......
आप सभी का धन्यवाद
वनदेमातरम
written by dhanujeet 905 days ago
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very good keep it up...!!!
written by god 907 days ago
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rajkamal, can i understand why you are repeating the comments here. Please avoid doing this we will have to restrict you form commenting or posting the articles. Thanks.
From all corners You are right and all who is against my posting is may be right but i am really not against any of marathi manus but i just want that just try to make our country united. In my office a lot of people laugh when they read or listen on this and says this is the reason we ruled your country for more than two century. You should oppose the system, you should oppose the corrupt people and boycott them but in maharashtra( specially in mumbai) you are beating poor and innocent people.They came to mumbai for survive only otherwise who want to leave his motherland/family. Have you read anything about the indian students were being beaten or killed in Australia, it same thing but in our case we are opposing result which can never be changed, how-any. To change all this we have to change the system and it will make our people and country strong and developed.
तुला प्रतिसाद मिळावेत, हेच तुला हवं होतं. तुझ्यादृष्टीने इतिहास माहित असणं म्हणजे जग माहित असणं आहे. भुंकत रहा. इतक्या दिवसात जर नीट वाचलं असतंस, तर मी मुलगी आहे, हेही समजलं असतं तुला. तुझ्या बोलण्यावरूनच तुझी मानसिकता कळते. दुसरे काय करत आहेत, हे न माहित करून घेता, मुर्खासारखा उपदेश करण्यापेक्षा तूच कैवार घेऊन समाजोपयोगी कामं का करत नाहीत?
written by mayuri6 907 days ago
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अग तुज अगदि बरोबर आहे या राजकमल कहि कम नहिये .............
written by rkrajkamal 907 days ago
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Kanchan ji,
See, here i am not to heart anyone. Sometime words can hit more then sword so if you feel i did all to heart anybody, then am really very sorry, but i also want nobody should be heart by any means.
this is the main motive i have. Everyone should respect human and humanity, if someone does not doing so then he is against human and humanity. We all should be united for such elements. Only Love&Peace brings progress.
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आप लोग पुरी तरह भटक चुके हैं और अब शायद ये सब आप के दिमाग में बैठ गई है अगर आप को लगता है के ये सही है तो ठीक है, अपने अधिकारों, संस्कृति, भाषा, मिट्टी, समुदाय, समाज, इतिहास, स्वतन्त्रता, आदि के समर्थन में लड़ना अच्छी बात है! और मैं इस बात मैं आप का पूरी तरह से समर्थन करता हूँ, मगर किसी को मारने का अधिकार किसी को नही है, देश मैं इतनी भी अराजकता नही है के दो टके की औकात के गुँड किसी गरीब और असहाय के ऊपर हिंसात्मक अत्याचार करें! मेरा विरोध आपके विरोध करने के तरीके पर है, आप एक आम आदमी को मार् सकते हैं मगर ये जो प्रणाली/सिस्टम है आप उसके खिलाफ कभी खड़े नही होते! मैंने तब भी विरोध किया था जब महाराष्ट्र की घटनाओ से आहत हो कर हरियाणा में कुछ लोगों ने एक मराठी मनुष्य के खिलाफ दुर्व्यवहार किया था! आप एक आम आदमी को मार् कर अपनी सभ्यता को कलंकित कर रहे हो, और वैसे भी अभद्र भाषा का प्रयोग और हिंसा का प्रयोग तो एक कमजोर और असभ्य आदमी करता है! लड़ना और भोंकना तो जानवर की प्रवर्ती है! आप विरोध करें और में खुद कह्ता हूँकि विरोध करो मगर अपनी सभ्यता और इन्सानियत का हनन कदाचित न करो!
हमारे क्षत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने भी विरोध किया था मगर अत्याचार का और उन्होने कभी निर्बल और गरीब को नही सताया ! शक्ति का प्रयोग निर्बल और गरीब की सहायता और उसके उत्थान के लिए तथा अत्याचार और बुराई का दमन करने के लिए किया जाता है! इस सब का पालन हमारे क्षत्रपति श्री शिवाजी महाराज जी ने किया इसी लिए वह सम्पूर्ण भारत में श्रद्धा और आदर से पूजे जाते हैं! मगर औरंगज़ेब को तो कोई भी नही मानता! इसी प्रकार ठाकरे परिवार की विध्वंस वाली राजनीति का मैं पुरजोर विरोध करता हूँ और करता रहूंगा! अगर वे इस विध्वंस वाली राजनीति को छोड दें तो शायद उन से अच्छा राजनीतिक दल शायद ही कोई हो ! याद रखो मिल कर चलने में ही सब का भला होता है! महाराष्ट्र के उत्थान के लिए ठाकरे परिवार ने बहुत अच्छे काम किए हैं मगर अब शायद ये सब जो हो रहा है सब दुखद है! अपने सुख के लिए किसी को सताना इन्सानियत नही है! मत बताओ दुसरे ने तुम्हारे लिए क्या किया, सोचो तुम ने क्या किया और जो किया क्या वो सही किया ! मानवता सर्वोपरि है! मानवता से बढ कर कुछ भी नही!
शिवाजी महाराज के टाईम का इतिहास तेरे जैसे लोगो से सुनने कि जरूरत नही है हमे...लेक्चर बाजी करनी है तो युपी या बिहार मे हि जाओ...यहा फाल्तु लोगोको हम भिक नहि डालते...आणि ही साईड आहे ना ति आम्हा मराठी लोकासाठी आहे...सगळी कडे भिका मगायची सवय जाणार कधी तुमची...!!!
दिखवा करुन नाही चालत मनातुन आल पाहिजे ते काय पाणि पुरी वीकन्या येवढ सोप नसत देशाबद्द्ल बोलण
जय भवानि...जय शिवाजी...जय महाराष्ट्र
इसका मतलब नही समझा होगा तो बाळासाहाब या राज ठाकरे साहाब से पुछ लेना
ए, राजकमल! तुझ्या बेगडी वाक्यांची नि तुझ्या खोट्या समर्थनाची गरज महाराष्ट्राला आणि मराठी माणसाला नाही. देशात अराजकता नाही म्हणतोस आणि देशाची अवनती होतेय, असंही म्हणतोस. वा, रे वा! तुला स्वत:ला समजतंय का, तू काय बोलतोयंस ते? आम्हाला शिवाजी महाराजांबद्दल आदर आहे, म्हणून तूही त्यांच्याबद्दल चांगलं बोललास, की तू बाकी इतर विषयावर काहीही प्रतिक्रिया दिलीस तर आम्ही ते खरं मानायचं का? हरियाणात रहाणा-या मराठी माणसाने "माझ्याशी मराठीत बोला" असा माजोरीपणा दाखवला नव्हता, जो इथे येऊन बिहारचे लोक दाखवतात. एका व्यक्तीच्या आंदोलनामागची भूमिकाच जर तुम्हा लोकांना समजून घ्यायची नसेल, तर असे प्रकार घडणारच.
"आमच्याच राज्यात आमच्या मातृभाषेला प्राधान्य द्या" असं हात जोडून विनवल्यानंतर सुद्धा जर तुमच्यासारख्यांना समजत नसेल, तर आम्ही काय तुमच्यासमोर भिक मागायची का रे? आम्ही हातात शस्त्र घेतलं की आम्ही हिंसक आणि "महाराष्ट्राचं बिहार करू" अशा आरोळ्या ठोकणारा लालू म्हणजे कोण? लालू नि मायावती का म्हणत नाहीत की आम्ही उत्तर प्रदेशात मराठी आणू, उत्तर प्रदेशात रहाणा-या मराठी लोकांना प्राधान्य देऊ? का भाषा करतात महाराष्ट्राला बिहार बनवण्याची? या त्यांच्या माजोरीपणाचा परिणाम आहे ’मनसे’.
तुझ्या बोलण्याचा रोख कायम असाच आहे, की मी जे बोलतोय, त्याला सहमती द्या. तुला मुळातच वाचनाची आवड कमी दिसते. लेख नीट न वाचता प्रतिक्रिया देणं हा तुझा स्थायीभाव बनला आहे. तू लिहितानाही विचार करत नाहीस, हे दिसतंय. इतिहास खूप माहित आहे ना तुला? औरंगजेबाने कित्येक मंदिरांना देणग्या दिल्या होत्या, हे ठाऊक आहे का तुला? त्याच्या या पुण्याईमुळे तो बरेच दिवस वाचला, शेवटी मंदिरांना देण-या त्याच हातांनी त्याने आई तुळजाभवानीवर घाला घातला म्हणून त्याचा सर्वनाश झाला.
मिळून वाटचाल करण्याची भाषा करतोस ना, ते तुझ्या भाऊबंदांना जाऊन सांग आणि स्वत:ही आत्मसात कर. त्यांना समजत नाही की महाराष्ट्रात रहायचं असेल, तर तिथल्या संस्कृतीशी एकरूप झालं पाहिजे. मिळून मिसळून रहाणे याचा अर्थ भैया महाराष्ट्रात येऊन माजोरडेपणा करणार तो मराठी लोकांनी सहन करायचा. तोच भैया आंध्र, बंगाल प्रांतात गेला की तिकडची भाषा, संस्कृती सर्व आत्मसात करणार. वा रे तुझी एकात्मता!
अफझलखानला कुणी मानत नाही असं म्हणणा-या तुझ्यासारख्या लोकांसाठी ही एक बातमी. नीट वाच आणि विचार कर. देशाची अधोगती म्हणजे काय आणि अराजक म्हणजे काय हे तुला कळेल.
http://www.epapergallery.com/Saamana/19Nov2009/Enlarge/Mumbai/page8.htm?CurrentSupplementIndex=0
राज कमल tula जर का etkich kalaji आहे न उत्तेर प्रदेश ची तर mag जा की तिकडे महाराष्ट्रात का रहतोस तू ?
ए, राजकमल! मराठी कट्ट्या वर तुझ्यासारख्या उपर्या चे काय काम?
विनोद तुज अगदी बरोबर आहे , राजकमल मराठी कट्ट्यावर कही कम नाहीये त्य्ने व्यवस्तित बगितल नहीं की हे कम्युनिटी फ़क्त मराठी लोकांसाठी आहे बहुतेक राज कमल ला व्यस्तित वाचता येत नहीं त्याच्य्सर्ख्या लोअक्न्मुलेच महाराष्ट्राची वाट लागली आहे ,......................
very good keep it up...!!!
rajkamal, can i understand why you are repeating the comments here. Please avoid doing this we will have to restrict you form commenting or posting the articles. Thanks.
तुला प्रतिसाद मिळावेत, हेच तुला हवं होतं. तुझ्यादृष्टीने इतिहास माहित असणं म्हणजे जग माहित असणं आहे. भुंकत रहा. इतक्या दिवसात जर नीट वाचलं असतंस, तर मी मुलगी आहे, हेही समजलं असतं तुला. तुझ्या बोलण्यावरूनच तुझी मानसिकता कळते. दुसरे काय करत आहेत, हे न माहित करून घेता, मुर्खासारखा उपदेश करण्यापेक्षा तूच कैवार घेऊन समाजोपयोगी कामं का करत नाहीत?
अग तुज अगदि बरोबर आहे या राजकमल कहि कम नहिये .............
Kanchan ji,
See, here i am not to heart anyone. Sometime words can hit more then sword so if you feel i did all to heart anybody, then am really very sorry, but i also want nobody should be heart by any means.
this is the main motive i have. Everyone should respect human and humanity, if someone does not doing so then he is against human and humanity. We all should be united for such elements. Only Love&Peace brings progress.
Everyone can see this in their own family.